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Tuesday, October 15, 2013

इक उल्झन बनि है

बातें चली इस तरह आँखों मे  आई नमी है
हर तरफ लगाता कोई अजिब सी कमि है
 शिकायत करु किससे और क्या कबुल करु
जिन्दगी अपने आप मे इक उल्झन बनि है  ।

Thursday, April 4, 2013

कुछ शायरी


आजकल आँखों में है कुछ अलग सा ख्वाब
तेरी बातों में जिन्दगी  की उन्मादों का शबाब
दुनियाँ की औकात हि क्या जो सवाल करे
तु मुझे दे, मै तुझे दु ,हर सवालों का जवाब  !!

बातें चली इस कदर


बातें चली इस कदर आँखों मे आई नमी है
हर तरफ लगता कोई अजिब सी कमि है
शिकायत करु किससे और क्या कबुल करु
जिन्दगी अपने आप मे इक उल्झन बनि है ।

Sunday, September 16, 2012

कितने मोड लेती है


"जिन्दगी भी नजाने कितने मोड लेती है
हर नई मोड पे इक अजीब सवाल देती है
ढुढते रहते है हम जवाब पल पल यहाँ
मिल भी जाए जबाब तो सवाल बदल देती है !!

निर्मला खड्का

दिलको जलाने लगी


"ढलती हुइ शाम ए शमा मेरे दिलको जलाने लगी
उसकी यादों की हवा दिलकी आगको भड्कने लगी
दिलको जलते देखकर मेरी आँखों से रहा ना गया
दोनो आँखें मिलकर उस दिलमे लागि आगको बुझाने लगी"

निर्मला खड्का

Tuesday, May 8, 2012

शेरहरु

निर्मला खड्का

ना पुछो दिलमे उसके लिए क्या क्या सौगात रखते है
वक्त आए तो उसको उसी से चुराने की औकात रखते है ।

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जलाकर आए हैं हम दिल अपना
खुदा उसी से रोशन करें राहें तेरी    !

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क्यु ना हम कुछ अजब सी बात करें
जो हमे भुल चुके है उन्हे ही याद करें   !!

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वो सोया था  बेखबर ख्वाबों को आगोश मे लिए
हम देखते रहे निद में उसके खलल ना पडे   !!!

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गुमसुम आखें जब युही नम हो जाएँ
वो तेरी याद आने का सबब होता है    !!

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