Monday, December 3, 2012

ख्वाहिशें पालें है दिलमें इक मौका मिले (कविता )


ख्वाहिशें पालें है दिलमें
इक मौका मिले
तुझसे मिलने कि
उस पलोंमे
तुम मेरे
दोनों हाथ पकड़ कर
अपने चेहरे पे रखो
बस
उसी वक़्त
मै चुरा लुंगी

तुम्हें तुम्हीं से
कुछ ज़ज्बातों के साथ
कुछ इरादों के साथ
और
तब तक
इन्ही हाथों में
संभालके रख लु
जब तक
मेरी सास रहेगीं जिस्म में
जब भी
खुश रहूँ या
उदास होऊ
मैं
यही हाथ
अपने चेहरे पे रखकर
तेरे चेहरे
से
अपना चेहरा
ढक लुँगी
इस एहसास के साथ
तुम मेरे साथ हो ,
तुम मेरे हो ,
इक जिन्दगी के लिए काफी है
ये तेरा एहसास
मुझें जिन्दा रखने लिये !


( किसिके लिए समर्पित )

1 comment:

  1. आपके द्वारा यह लाजवाब प्रस्तुति जिसे पढ़ हम सराबोर हुए अब गुलशन-ए-महफ़िल बन आवाम को भी लुभाएगी | आप भी आयें और अपनी पोस्ट को (बृहस्पतिवार, ३० मई, २०१3) को प्रस्तुत होने वाली - मेरी पहली हलचल - की शोभा बढ़ाते देखिये | आपका स्वागत है अपने विचार व्यक्त करने के लिए और अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करने के लिए | आइये आप, मैं और हम सब मिलकर नए लिंकस को पढ़ें हलचल मचाएं | आभार

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