Wednesday, March 12, 2014

एक उम्र

कहानी
लम्हें /लम्हात
कोई  किताब
फिर सवालात
दिवारे /आंशियाँ
जज्बात / सौगात
सन्नाटे का आलम
बेवजह उदासीका सबब
हालात
नसीहतें
दहलिज
खामोश  चौखटें- आगन
ब्याकुल स्तुती

किस्से
बेफिक्री अलमस्ती की
हरियाली ,खलिहान
महकता गुलाब
लाल गुलमोहर
बर्साती संगीत
बातें निकली जब दुर तक
बिना जवाब के सवालात के साथ
एक उम्र छुट गई हाथो से ।

4 comments:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी इस विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - दोगला समाज पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

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    1. हार्दिक आभार तुषार जी !

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  2. बेहतरीन
    होली की अग्रिम शुभकामनायें :)

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    1. शुक्रिया मुकेश जी , आपको भी होली कि ढेर सारी शुभाकमनाएं :)

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