Tuesday, May 21, 2013

खै भूल गरे या प्यार गरे


खै भूल गरे या प्यार गरे
तर जे गरे बर्बाद गरे ।

धेरै हैन हिजो र आजमा
बदलाव छ अन्दाज गरे ।

प्रेम हो भने नजरको प्यास
चाहलाई यसै सम्मान गरे ।

तिम्रो खुशीमा यात्रा मोडेर
वाह ! कस्तो यो कमाल गरे ।

एक्लो छैन यी यादहरुसंग
यसै पिडा  आत्मसात गरे ।

3 comments:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज ३० मई, २०१३, बृहस्पतिवार के ब्लॉग बुलेटिन - जीवन के कुछ सत्य अनुभव पर लिंक किया है | बहुत बहुत बधाई |

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  2. वाह ,बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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  3. मेरी कोशिसोँ को प्यार देने के लिए हार्दिक धन्यबाद तुषार राज रस्तोगीजी और मदन मोहन जी ।

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